पल ღღ

कुछ अच्छे कुछ बुरे......

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धक्का स्टार्ट शादी

Posted On: 25 Sep, 2013 कविता में

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घरवालों को एक दिन
जाने क्या सुझा।
उन्होने मुझसे कुछ
नही पूछा।

सोच ली उन्होने
मेरी बरबादी।
करवाने चले
मेरी शादी।

लड़की देखने चले गए,
अच्छे भले गए।
हाए किस्मत,
आगे जाके हम तो
छ्ले गए।

शक्ल सूरत से
लड़की ठीक थी।
पर हालत उसकी
मुझसे भी वीक(weak) थी।

हमने सोचा चलो
जाने दो।
भूख लगी है,
पहले खाना आने दो।

खाने की थाली आई,
हमने नाक चढ़ाई।
हाए यहाँ भी घिया,
लड़की वालों ने ये
अच्छा नहीं किया।

हम तो सर पे
पैर रखकर भागे।
ना पीछे देखा,
ना आगे।

बच गए हम बरबादी से,
दूर हुए शादी से।



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yatindranathchaturvedi के द्वारा
September 28, 2013

बेहतरीन


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